हम न कहते थे कि मत दैर-ओ-हरम की राह चल — मीर तक़ी मीर
“We did not say that one should walk the path of the forbidden, / But now this claim has spread among the learned and the common.”
अर्थ
हमने नहीं कहा था कि दैर-ओ-हरम का मार्ग मत अपनाना, पर अब यह दावा विद्वानों और साधारण लोगों में फैल गया है।
विस्तार
यह शेर किसी विचार या सच्चाई की व्यापकता को दर्शाता है। शायर कह रहे हैं कि उन्होंने कभी किसी को धार्मिक रास्ते पर चलने से रोका नहीं। लेकिन अब, यह दावा... यह बात इतनी फैल गई है कि यह न सिर्फ़ विद्वानों (शैख़) तक सीमित है, बल्कि आम लोगों (बरहमन) में भी है। यह मिर्ज़ा तक़ी मीर का कहना है कि सच्चाई का प्रभाव इतना गहरा है कि वह क़यामत तक कायम रहेगा।
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