आह किस अंदाज़ से गुज़रा बयाबाँ से कि 'मीर' — मीर तक़ी मीर

आह किस अंदाज़ से गुज़रा बयाबाँ से कि 'मीर' जी हर इक नख़चीर का उस सैद-ए-अफ़्गन में रहा

“Oh, what a style with which you passed through the desert, 'Meer' / That every trace of your existence remained in that Afghan saint.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

अरे, किस अंदाज़ से गुज़रे तू रेगिस्तान से, कि 'मीर'। हर एक नक़्श़ीर का उस अफगानी सैद में रहा।

विस्तार

यह शेर किसी की असाधारण खूबसूरती और मौजूदगी के असर को बयां करता है। शायर कहते हैं कि यह व्यक्ति किसी रेगिस्तान की तरह गुज़रा, लेकिन उस गुज़रने का अंदाज़ इतना गहरा था कि उस रेगिस्तान की हर नक़्क़ाशी, हर एक बात, उस शख़्स की याद में ज़िंदा रह गई। यह तारीफ़ है कि आपका वजूद कितना यादगार होता है।

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