डर से उस शमशीर-ज़न के जौहर आईना साँ — मीर तक़ी मीर
डर से उस शमशीर-ज़न के जौहर आईना साँ
सर से ले कर पाँव तक मैं ग़र्क़ आहन में रहा
“From the shining mirror of the sword-wielder's fear, I remained immersed in the tide from head to toe.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
डर से उस तलवार चलाने वाले के जौहर आईने से, मैं सिर से लेकर पैर तक ज्वार में डूबा रहा।
विस्तार
यह शेर बताता है कि किसी की खूबसूरती और अदाकारी कितनी खतरनाक हो सकती है। 'शमशीर-ज़न' सिर्फ एक किरदार नहीं, बल्कि एक एहसास है—जो बेहद खूबसूरत है, लेकिन साथ ही बहुत ख़तरनाक भी। शायर कहते हैं कि उसकी चमक, उसकी उपस्थिति इतनी भारी थी कि मैं डर के मारे, सिर से लेकर पैर तक, एक गहरे समंदर में डूब गया था।
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