पंजा-ए-गुल की तरह दीवानगी में हाथ को — मीर तक़ी मीर
पंजा-ए-गुल की तरह दीवानगी में हाथ को
गर निकाला में गरेबाँ से तो दामन में रहा
“Like a garden of flowers, the madness took hold of the hand, If pulled from the curtain, it remained in the hem.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
फूलों के गुलदस्ते की तरह दीवानगी में हाथ को गर निकाला, तो वह परदे से निकलकर भी दामन में ही रहा।
विस्तार
यह शेर इश्क़ की उस गहरी और मदहोश भावना को बयां करता है। शायर कहते हैं कि दीवानगी में हाथ तो फूल के पंजे जैसे नाज़ुक हैं। लेकिन, अगर मैं उस वीरान रास्ते से भी विदा हो जाऊँ.... तो भी यह एहसास, यह महक, मेरे दिल के दामन में हमेशा बसी रहेगी। यह वफ़ा और समर्पण का एक बहुत ही खूबसूरत इज़हार है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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