बे-कसाना जी गिरफ़्तारी से शेवन में रहा — मीर तक़ी मीर
बे-कसाना जी गिरफ़्तारी से शेवन में रहा
इक दिल-ए-ग़म-ख़्वार रखते थे सो गुलशन में रहा
“Be-Kasana Ji, in confinement, spent time in the garden of sorrow, A heart that was an admirer of sorrow remained in the blooming paradise.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
बे-कसाना जी को गिरफ़्तारी से शेवन में रहना पड़ा, पर उनका ग़म-ख़्वार दिल एक गुलशन में रहा।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर ने जीवन के विरोधाभास को दर्शाया है। शायर कहते हैं कि भले ही शरीर सलाखों के पीछे हो, लेकिन दिल की तड़प और गम को पालने की जगह कहीं और होती है। यह दिखाता है कि हमारी असली पहचान और हमारा दर्द, न कि हमारा भौतिक ठिकाना होता है। गम को अपनाना ही एक तरह की आज़ादी है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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