बहुत चाहा था अब्र-ए-तर ने लेकिन — मीर तक़ी मीर
बहुत चाहा था अब्र-ए-तर ने लेकिन
न मिन्नत-कश हुआ गुलशन हमारा
“The rain-like desire had longed to visit us, but our garden was not susceptible to pleas.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
बादलों की बारिश ने बहुत इच्छा की थी, लेकिन हमारा बाग़ मनवाने को तैयार नहीं हुआ।
विस्तार
यह शेर दिल की एक बहुत गहरी और ज़िद्दी बात कहता है। यहाँ 'अब्र-ए-तर' वो तीव्र मोहब्बत या हालात हैं जो हर तरफ से प्यार बरसा रहे हैं। और 'गुलशन' हमारा दिल है। शायर कहते हैं कि चाहे इश्क़ का सैलाब कितना भी ज़ोरदार क्यों न हो.... चाहे दुनिया कितनी भी मिन्नत करे.... हमारा दिल आसानी से नहीं पिघलता। इसमें एक अपनी इज़्ज़त और एक अपनी रस्म-रिवाज है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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