सितम में ग़म में सर-अंजाम उस का क्या कहिए — मीर तक़ी मीर
सितम में ग़म में सर-अंजाम उस का क्या कहिए
हज़ारों हसरतें थीं तिस पे जी को मार रहा
“What can we say of his end, in sorrow and cruelty, For countless desires were killing the soul.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
सितम और ग़म में उसका अंत क्या कहना, क्योंकि हज़ारों हसरतें ही मन को मार रही थीं।
विस्तार
यह शेर उस दर्द को बयां करता है जब महबूब बहुत तड़प रहा हो। शायर कहते हैं कि हम उसके सताए हुए अंजाम के बारे में क्या कह सकते हैं... क्योंकि वो तो ग़म और सितम में जी रहा है। और इस दर्द के बीच, हमारी अपनी हज़ारों हसरतें हैं जो हमारे दिल को जला रही हैं। यह वो उलझन है जब देखना भी गुनाह लगता है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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