तमाम-उम्र गई उस पे हाथ रखते हमें — मीर तक़ी मीर
तमाम-उम्र गई उस पे हाथ रखते हमें
वो दर्दनाक अलर्रग़्म बे-क़रार रहा
“All our lifetime we kept our hands upon her, / Yet she remained a painful, restless enigma.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
तमाम उम्र तक हमने उसके ऊपर हाथ रखे, लेकिन वह एक दर्दनाक, बेचैन रहस्य बनी रही।
विस्तार
यह शेर इश्क़ की उस गहरी उलझन को बयां करता है, जहाँ ज़िंदगी भर किसी के पास रहना एक आदत बन जाती है। शायर कहते हैं कि तमाम उम्र हमने तो उसके साथ रहना सीख लिया, लेकिन वो बेचैनी.... वो दर्दनाक अलर्रग़्म... वो कभी कम नहीं हुआ। यह दर्द ही हमारा हमदम बन गया, जो हमेशा हमें याद दिलाता है कि इश्क़ का अंजाम क्या होता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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