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आई नज़र जो गोर सुलैमाँ की एक रोज़
कूचे पर उस मज़ार के था ये रक़म हुआ

When my gaze fell upon the tomb of the glorious Sulaiman, on that day, I was in the street.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

जब मेरी नज़र गोर सुलैमाँ की क़ब्र पर पड़ी, तो मैं उस मज़ार के पास गली में था।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब के ज़माने की यादों और किस्मत के असर को बयां करता है। शायर कहते हैं कि एक दिन उनकी नज़र 'गोर सुलैमाँ' के मज़ार पर पड़ी। यह सिर्फ एक जगह का ज़िक्र नहीं है.... बल्कि यह एक मोड़ है! यह दिखाता है कि कुछ जगहें इतनी गहरी यादें समेटे होती हैं कि वे हमारे जीवन की दिशा बदल देती हैं। यह मक़बरा सिर्फ पत्थर नहीं, बल्कि एक एहसास है।

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