चाह बेजा न थी ज़ुलेख़ा की — मीर तक़ी मीर

चाह बेजा न थी ज़ुलेख़ा की माह-ए-कनआँ अज़ीज़ कोई था

“Zulekha's beauty was not wasted, There was a beloved like the moon in Kanwa.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

ज़ुलेख़ा की सुंदरता व्यर्थ नहीं थी; कनवां में चाँद जैसा कोई प्रिय था।

विस्तार

यह शेर गहरे इश्क़ और समर्पण की बात करता है। शायर कहते हैं कि ज़ुलेखा, जो अपनी बेमिसाल खूबसूरती के लिए जानी जाती थीं, उन्हें कनवां के चाँद से कोई चाहत नहीं थी। उनका दिल तो किसी और के लिए धड़कता था—किसी ऐसे महबूब के लिए, जिसकी खूबसूरती किसी चाँद से कहीं ज़्यादा अज़ीज़ थी। यह सच्चे प्यार की पराकाष्ठा को बयां करता है।

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