शब को उस का ख़याल था दिल में — मीर तक़ी मीर

शब को उस का ख़याल था दिल में घर में मेहमाँ अज़ीज़ कोई था

“In his heart, he carried memories of his beloved, For in the house, there was a cherished guest.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शब के दिल में उस का ख़याल था, क्योंकि घर में कोई अज़ीज़ मेहमाँ था।

विस्तार

यह शेर गहरे इश्क़ और तड़प को बयान करता है। शायर कह रहे हैं कि रात के सन्नाटे में, दिल बस उसी की यादों में खोया रहता है। और दूसरी पंक्ति... 'घर में मेहमाँ अज़ीज़ कोई था'... इसका मतलब है कि महबूब का ज़िक्र इतना गहरा है कि न तो घर में कोई और मेहमान मायने रखता है, न ही कोई और शख़्स दिल को सुकून दे सकता है। यह वफ़ा का नशा है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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