अब तो उस की गली में ख़ार है लेक — मीर तक़ी मीर

अब तो उस की गली में ख़ार है लेक 'मीर' बे-जाँ अज़ीज़ कोई था

“Now, in his street, there is a thorn, O Mir, How could I lose someone so dear?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

अब तो उसकी गली में काँटा है, ऐ मीर, कोई प्यारा बेजाऩ कैसे हो सकता था।

विस्तार

यह शेर टूटे हुए दिल की कहानी कहता है। शायर कहते हैं कि महबूब की गली अब ख़तरों से भरी है—जहाँ खूबसूरती (लेक) भी है और नुकीला दर्द (ख़ार) भी। और फिर वो आख़िरी लाइन... कि कोई अज़ीज़ नहीं था! यह एक गहरा दर्द है, जो बताता है कि प्यार की शुरुआत भले ही मीठी हो, लेकिन अंत में सच्चाई बहुत कड़वी होती है। शायर ने अपनी मोहब्बत के टूटने का ये दर्द बयां किया है।

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