हर चंद शोर-ए-महशर अब भी है दर पे लेकिन — मीर तक़ी मीर

हर चंद शोर-ए-महशर अब भी है दर पे लेकिन निकलेगा यार घर से होवेगा जब तमाशा

“The clamor of the Day of Judgment still echoes at the door, But the spectacle will only begin when my friend leaves home.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हर जगह अभी भी क़यामत का शोर है, लेकिन असली तमाशा तब शुरू होगा जब दोस्त घर से बाहर निकलेगा।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर ने बड़ी ही नज़ाकत से लिखा है। शायर कहते हैं कि महशर का शोर तो बहुत बड़ा, बहुत भयानक है, लेकिन वो असली तमाशा... वो जो महबूब के घर से निकलेगा, वो कहीं ज़्यादा डरावना होगा। यानी, दुनिया के बड़े तबाही से ज़्यादा, इश्क़ का दर्द और उसकी उलझनें हमें तोड़ देती हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.