जी खिंचे जाते हैं फ़र्त-ए-शौक़ से आँखों की और — मीर तक़ी मीर
जी खिंचे जाते हैं फ़र्त-ए-शौक़ से आँखों की और
जिन ने देखा एक-दम उस को सो बे-दम हो गया
“The eyes are drawn by the current of longing, And those who behold it become lifeless.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
आँखें चाहत के बहाव से खिंची चली जाती हैं, और जिन लोगों ने इसे देखा, वे तुरंत बेजान हो गए।
विस्तार
यह शेर उस इश्क़ की बात करता है, जो नज़रों से शुरू होता है और रूह को तकब्बरे कर देता है। शायर कहते हैं कि ये आँखें.... सिर्फ़ देखने के लिए नहीं हैं, बल्कि ये तो शौक़ की फ़र्त से खिंची चली जाती हैं। और जो भी किसी की इस निगाह को देख ले.... वह पल भर में ही बे-दम हो जाता है। यह इश्क़ का वो नशा है, जो जान ले लेता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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