इश्क़ उन शहरी ग़ज़ालों का जुनूँ को अब खिंचा — मीर तक़ी मीर

इश्क़ उन शहरी ग़ज़ालों का जुनूँ को अब खिंचा वहशत-ए-दिल बढ़ गई आराम-ए-जाँ रम हो गया

“The passion for those city-style ghazals has now pulled me; My heart's wildness has increased, and the soul's ease has become a pleasure.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शहर की गज़लों का इश्क़ अब जुनून बनकर खिंच गया; दिल की वहशत बढ़ गई और रूह का आराम एक मज़ा बन गया।

विस्तार

ये शेर आधुनिक प्रेम की उलझन को बयान करता है। शायर कहते हैं कि आज का इश्क़ उन शहरी ग़ज़लों के जुनून में खिंचा गया है। सबसे गहरा विरोधाभास दूसरी लाइन में है: दिल की तन्हाई तो बढ़ती जा रही है, लेकिन आत्मा को एक अजीब सा नशा... एक मदहोशी मिल गई है। यह उस दर्द भरे, मगर नशीले एहसास को दर्शाता है, जब आप टूटने के बावजूद खुश महसूस करते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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