वक़्त तब तक था तो सज्दा मस्जिदों में कुफ़्र था — मीर तक़ी मीर
“When time was still, disbelief was in the mosques; / Now that the pillar of faith has become bent, what use is it?”
अर्थ
शायर कहता है कि जब समय था, तब मस्जिदों में सज्दा करने के बावजूद कुफ़्र (नास्तिकता) व्याप्त था; अब जब आस्था का स्तंभ (क़द) मेहराब की तरह झुक गया है, तो इसका क्या फ़ायदा है।
विस्तार
यह शेर केवल धर्म या पूजा-पाठ की बात नहीं करता, बल्कि यह किसी भी व्यवस्था के पतन को दर्शाता है। शायर कहते हैं कि एक समय था जब पूजा-पाठ में भी संदेह था, लेकिन कम से कम ढाँचा तो था। लेकिन अब.... जब बुनियाद ही हिल गई है, जब मेहराब का स्तंभ ही झुक गया है, तो उस पूजा का क्या फ़ायदा? यह एक गहरे निराशा और टूटन का एहसास है।
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