उस आफ़्ताब बिन नहीं कुछ सूझता हमें — मीर तक़ी मीर

उस आफ़्ताब बिन नहीं कुछ सूझता हमें गर ये ही अपने दिन हैं तो तारीक शब है क्या

“Without that sun, nothing seems clear to us, If these are our days, then what is this dark night?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

उस सूरज के बिना हमें कुछ समझ नहीं आता, और अगर ये ही हमारे दिन हैं, तो ये अंधेरी रात क्या है।

विस्तार

यह शेर उस बेचैनी और उलझन को बयां करता है जब जीवन से रोशनी या उम्मीद चली जाती है। शायर पूछ रहे हैं कि अगर वह 'आफ़ताब' (रोशनी) ही नहीं है, तो हमें क्या समझ आएगा? यह एक गहरा भावनात्मक चित्रण है, जहाँ महबूब का दूर होना या किसी सच्चाई का खो जाना, एक ऐसी काली रात जैसा लगता है... जो कभी खत्म नहीं होती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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