रफ़्तार-ओ-तौर-ओ-तर्ज़-ओ-रविश का ये ढब है क्या — मीर तक़ी मीर
“What is this deluge of speed, manner, style, and grace? / Were your ways always like this, or has something changed?”
अर्थ
रफ़्तार, ढंग, अंदाज़ और नज़ाकत का ये कैसा सैलाब है? क्या पहले तुम्हारे व्यवहार ऐसे ही थे, या अब कुछ बदल गया है?
विस्तार
यह शेर उस दर्द को बयां करता है जब आपको अपने महबूब में कोई बड़ा बदलाव नज़र आता है। शायर पूछ रहे हैं कि क्या आज का ये अंदाज़, ये रफ़्तार... वही है जो पहले हुआ करता था? यह सिर्फ़ एक सवाल नहीं है, बल्कि उस सुकून और रिश्ते के खो जाने का दर्द है, जो पहले था। एक मीठा सा इल्ज़ाम है, एक तन्हाई का एहसास।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
