आलम की बे-फ़िज़ाई से तंग आ गए थे हम — मीर तक़ी मीर

आलम की बे-फ़िज़ाई से तंग आ गए थे हम जागा से दिल गया जो हमारा बजा हुआ

“We were weary of the world's artificiality, When our heart departed from the source of life.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हम दुनिया की कृत्रिमता से तंग आ गए थे, जब हमारा दिल जीवन के स्रोत से दूर हो गया।

विस्तार

यह शेर जीवन की उस निराशा और बेचैनी को बयां करता है, जब इंसान दुनिया की रस्मों और बेमानी बातों से तंग आ जाता है। शायर कहते हैं कि यह दुनिया इतनी नीरस हो गई है कि दिल को कहीं और जगह मिल गई है। यह सिर्फ़ दिल का भटकना नहीं है, बल्कि आत्मा का उस सुकून को ढूंढना है जो इस दुनिया के शोरगुल में नहीं मिल रहा।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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