हैरान रंग बाग़-ए-जहाँ था बहुत रुका — मीर तक़ी मीर
हैरान रंग बाग़-ए-जहाँ था बहुत रुका
तस्वीर की कली की तरह दिल न वा हुआ
“The garden of the world, in its wondrous colors, had paused for a long time, But my heart did not become like the bud of a picture.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हैरान रंगों से भरे बाग़-ए-जहाँ बहुत रुका, पर मेरा दिल तस्वीर की कली जैसा नहीं हुआ।
विस्तार
दोस्तों, मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब ने यहाँ दिल की एक बहुत गहरी बात कही है। शायर कह रहे हैं कि भले ही दुनिया का पूरा बाग़, हर रंग में आकर, ठहरा हुआ था.... लेकिन मेरा दिल तो किसी कली की तरह नहीं खिला! इसका मतलब है कि कुछ एहसास ऐसे होते हैं.... जो दुनिया की सारी खूबसूरती या ठहराव से भी बेपरवाह रहते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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