क़ासिद को दे के ख़त नहीं कुछ भेजना ज़रूर — मीर तक़ी मीर
क़ासिद को दे के ख़त नहीं कुछ भेजना ज़रूर
जाता है अब तो जी ही हमारा चला हुआ
“Do not send any letter to the messenger, by all means, For now, our very life is the thing that is going.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
कासिद को देकर ख़त नहीं कुछ भेजना ज़रूर। जाता है अब तो जी ही हमारा चला हुआ।
विस्तार
यह शेर उस पल को बयान करता है जब दिल का दर्द इतना गहरा हो जाता है कि इंसान खुद को छोड़ने लगता है। शायर कह रहे हैं कि क़ासिद को कोई ख़त मत देना, क्योंकि अब तो मेरा जीना ही थम गया है। यह केवल दूर जाना नहीं है, यह आत्मा का थक जाना है, एक गहरी, शांत विदाई है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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