चाक पर चाक हुआ जूँ जूँ सुलाया हम ने — मीर तक़ी मीर

चाक पर चाक हुआ जूँ जूँ सुलाया हम ने इस गरेबाँ ही से अब हाथ उठाया हम ने

“The wheel turned upon the axle, we made it sleep so gently, From this very embrace, we have now raised our hand.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

चक्र पर चक्र घूम गया, हमने उसे इतना सुलाया कि अब इसी आलिंगन से हमने हाथ उठा लिया।

विस्तार

यह शेर बंदिश और आज़ादी के बीच के गहरे रिश्ते को दिखाता है। शायर कहते हैं कि जीवन की चक्की (चाक) हमेशा चलती रहती है, यानी संघर्ष कभी रुकता नहीं। लेकिन शायर का कहना है कि इस 'गरेबाँ' या कैद से ही, अब उन्होंने अपना हाथ उठाया है! इसका मतलब है कि सबसे बड़ी क्रांति या बदलाव बाहर से नहीं, बल्कि अंदरूनी संघर्ष से ही पैदा होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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