आब-ए-ख़िज़र से भी न गई सोज़िश-ए-जिगर
क्या जानिए ये आग है किस दूदमान से
“Even from the water of Khizr, the burning of the heart did not depart; who knows from what potent source this fire springs.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
ख़िज़्र के पानी से भी दिल का जलना दूर नहीं हुआ; यह आग किस शक्तिशाली स्रोत से निकल रही है, कौन जानता है।
विस्तार
यह शेर दिल की उस गहरी और अनजानी आग को बयां करता है। ख़िज़र का पानी तो हर मर्ज की दवा है, लेकिन शायर कहते हैं कि इस जिगर की जलन तो उस पानी से भी नहीं बुझी। यह सवाल करना कि ये आग कहाँ से आई, उस दर्द की पराकाष्ठा है जो किसी इलाज से परे होता है। यह इश्क़ के गहरे, रहस्यमय दर्द को बयां करता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
