“Do not pass by my dust, O moon, from the marble floor; / We too were among the adornments of a flowing stream.”
ऐ चाँद, हमारी धूल पर मत गुज़र, जो तख़्तूर से होकर गुज़रती है। हम भी एक बहती हुई धारा की शोभा-समृद्धि के नज़ारों में थे।
यह शेर एक गहरे स्वाभिमान और आत्मसम्मान की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि आप चाँद (या महबूब) हमारी यादों और हमारे अस्तित्व की धूल पर से गुज़रना, ये नहीं। क्योंकि हम भी कभी इस दुनिया के बहुत इज़्ज़तदार और नज़रों के केंद्र में थे। यह सिर्फ एक चेतावनी नहीं है, बल्कि उस शान का ऐलान है जो वक्त के साथ मिटती नहीं है। एक शायर के लिए, यह अपनी गरिमा को बचाए रखना है।
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