ज़ेर-ए-फ़लक भला तो रोवे है आप को 'मीर'
किस किस तरह का आलम याँ ख़ाक हो गया है
“Oh, Zair-e-falak, if you weep, then weep for you, 'Mir', What kind of world or state has become mere dust.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अर्थात, हे आसमान! यदि तुम रोओ, तो रोओ मेरे लिए, 'मीर'। किस तरह की दुनिया या स्थिति यहाँ केवल धूल बनकर रह गई है।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर के गहरे एहसास को बयां करता है। शायर पूछते हैं कि किस तरह का आलम हो गया है, कि अब तो सब कुछ बस 'ख़ाक' ही रह गया है। ज़ेर-ए-फ़लक का रोना, ये महज़ एक उपमा है... जो बताती है कि किसी की तबाही कितनी बड़ी है। यह न सिर्फ़ एक व्यक्ति का दर्द है, बल्कि एक पूरे युग की उदासी है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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