सरसरी कुछ सुन लिया फिर वाह-वा कर उठ गए
शे'र ये कम-फ़हम समझे हैं ख़याल बंग है
“Having merely heard a little, they arose, praising it with fanfare; this couplet, the simple-minded have misunderstood it, it is a thought of Khayal Bang.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
सरसरी कुछ सुनकर ही उन्होंने वाह-वाह करते हुए उठ गए; यह शेर कम-समझ वाले लोग समझ गए हैं, यह ख़याल बंग का विचार है।
विस्तार
यह शेर उस दर्द को बयां करता है जब कला या शायरी की गहराई को लोग समझ नहीं पाते। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि लोग बस सरसरी निगाह से कुछ सुन लेते हैं, और वाह-वाह करके अपनी तारीफें कर उठते हैं। लेकिन शायर का कहना है कि इस शेर को जो कम-फ़हम समझ रहे हैं, वो असलियत से दूर हैं। यह समझाना है कि कला की समझ कितनी मुश्किल होती है।
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