जाँ-गुदाज़ इतनी कहाँ आवाज़-ए-ऊद-ओ-चंग है
दिल के से नालों का उन पर्दों में कुछ आहंग है
“How loud is the call of the ud and chang, O wanderer of the heart? / Is there any melody in those veils of the heart's streams?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जाँ-गुदाज़, इतनी कहाँ ऊद और चंग की आवाज़ है। दिल की नालों के उन पर्दों में भी कुछ आहंग है।
विस्तार
यह शेर दिल की गहराई से निकली आवाज़ की बात करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर पूछते हैं कि वह मदहोश करने वाली ऊद और चंग की आवाज़ कहाँ है? उनका कहना है कि असली संगीत बाहरी वाद्ययंत्रों में नहीं है। वह कहते हैं कि दिल की नसों में, उन परदों के पीछे, एक अपना ही मीठा सा 'आहंग' (ताल या धुन) मौजूद है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
1 / 12Next →
