छोड़ मत नक़्द वक़्त-ए-नसिया पर — मीर तक़ी मीर
छोड़ मत नक़्द वक़्त-ए-नसिया पर
आज जो कुछ है सो कहाँ कल है
“Do not abandon the time of forgetfulness, for what is here today, will not be what it is tomorrow.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायर कह रहे हैं कि नक़द वक़्त-ए-नसिया को मत छोड़ना, क्योंकि आज जो कुछ है, वह कल नहीं रहेगा।
विस्तार
यह शेर हमें वक़्त की नश्वरता का गहरा एहसास दिलाता है। शायर साहब कहते हैं कि ज़िंदगी को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। वक़्त-ए-नसिया पर छोड़ना मत, यानी ज़िंदगी के हर पल का महत्व समझना। क्योंकि आज जो कुछ भी है, यह कल नहीं रहेगा। यह एक चेतावनी है कि हमें हर पल को जीना होगा, क्योंकि समय किसी के लिए नहीं रुकता।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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