रोज़ कहते हैं चलने को ख़ूबाँ — मीर तक़ी मीर

रोज़ कहते हैं चलने को ख़ूबाँ लेकिन अब तक तो रोज़-ए-अव्वल है

“They constantly say to walk the path, But it is still only the first day.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हर कोई लगातार आगे बढ़ने और जीवन का मार्ग अपनाने की बात करता है, लेकिन अभी भी यह केवल शुरुआत का दिन है।

विस्तार

यह शेर उस गहरी निराशा को बयां करता है जब बदलाव की बात तो रोज़ होती है, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता। मिर्ज़ा तक़ी मीर कह रहे हैं कि लोग हर दिन 'चलने' की बात करते हैं, लेकिन असलियत में तो सब कुछ वैसा ही है, जैसे पहला दिन। यह शे'र शब्दों और अमल के बीच के बड़े अंतर को दिखाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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