फिर न शैताँ सुजूद-ए-आदम से — मीर तक़ी मीर

फिर न शैताँ सुजूद-ए-आदम से शायद उस पर्दे में ख़ुदा होवे

“From the prostration of Adam, perhaps, no devil's sway, Maybe God shall be found within that veil's display.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शायर कहता है कि शायद आदम के नमाज़ (सुजूद) से शैतान को कोई असर न हो, और शायद ईश्वर उस पर्दे के अंदर पाया जा सके।

विस्तार

यह शेर सिर्फ एक घटना की बात नहीं करता, बल्कि अस्तित्व के गहरे रहस्य की बात करता है। शायर यहाँ एक बहुत ही दार्शनिक विचार दे रहे हैं। वो कह रहे हैं कि सबसे बड़ा डर शैतान का कोई काम नहीं है, बल्कि यह कि खुदा की असलियत.... उस पर्दे के पीछे छिपी हुई है। यह इंसानी नज़रिए और दैवीय रहस्य के बीच का एक अद्भुत संवाद है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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