आलम में आब-ओ-गिल का ठहराव किस तरह हो
गर ख़ाक है अड़े है वर आब है रवाँ है
“How can there be a stillness of water and air in the world, When the dust is stuck, and the water is flowing?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
आलम में आब-ओ-गिल का ठहराव किस तरह हो, जब ख़ाक अड़ी है और पानी बह रहा है।
विस्तार
यह शेर जीवन के सबसे गहरे सच को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर पूछते हैं कि क्या इस दुनिया में ठहराव हो सकता है? शायर कहते हैं कि जब पानी लगातार बह रहा है और धूल भी अपनी जगह पर है, तो ठहराव होना नामुमकिन है। यह हमें सिखाता है कि ज़िंदगी में हर पल बदलाव है, हर चीज़ गतिशील है।
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