गर इस चमन में वो भी इक ही लब-ओ-दहाँ है लेकिन सुख़न का तुझ से ग़ुंचे को मुँह कहाँ है

“If in this garden, he also has but one mouth and face, Where is the way for the bloom, from your speech's grace?”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

यदि इस बाग में उसका भी एक ही मुँह और ठिकाना है, तो तुम्हारे वचन की कृपा से फूल को रास्ता कहाँ है।

विस्तार

यह शेर उस दर्द को बयां करता है जब महबूब नज़दीक होते हुए भी दिल की बात नहीं कह पाते। शायर कहते हैं कि भले ही इस चमन में महबूब का होना एक ही जगह है, लेकिन आपके लबों से, आपके दिल से कोई बात, कोई इकरार कहाँ से आएगा? यह एक गहरा सवाल है—क्या नज़दीकी के बावजूद, आप अपनी भावनाओं को हमसे छिपा रहे हैं?

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