क्या 'मीर' तू रोता है पामाली-ए-दिल ही को — मीर तक़ी मीर

क्या 'मीर' तू रोता है पामाली-ए-दिल ही को उन लौंडों ने तो दिल्ली सब सर पे उठा ली है

“O Mir, do you weep for the mischief of your heart, Those boys have raised up Delhi upon their heads.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

क्या 'मीर' तू केवल अपने मन की शरारत के लिए रोता है, जबकि उन लड़कों ने तो दिल्ली को पूरी तरह से हिला दिया है।

विस्तार

यह शेर एक गहरी तल्खी और चुनौती है। शायर यहाँ पूछ रहे हैं कि 'मीर', क्या तुम सिर्फ़ अपने दिल के टूटे हुए टुकड़ों पर रो रहे हो? जैसे ही शायर यह कहते हैं, तो उनका इशारा इतिहास की बड़ी घटनाओं की तरफ़ होता है। वे कहते हैं कि ये नौजवान तो दिल्ली को ही हिलाकर रख दिया है! यह एक सवाल है कि क्या हमें निजी गम में खोए रहना चाहिए, या हमें दुनिया के बड़े बदलावों पर भी ध्यान देना चाहिए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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