फिर उस से तरह कुछ जो दा'वे की सी डाली है — मीर तक़ी मीर

फिर उस से तरह कुछ जो दा'वे की सी डाली है क्या ताज़ा कोई गुल ने अब शाख़ निकाली है

“Like that, some who claim to have given a branch, Has any fresh flower now sprouted a shoot?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

फिर उस से तरह कुछ जो दा'वे की सी डाली है, क्या ताज़ा कोई गुल ने अब शाख़ निकाली है। इसका अर्थ है कि किसी ने जो पहले दावे किए थे, क्या कोई नया फूल अब कोई नई शाखा लेकर आया है।

विस्तार

यह शेर वादों की नश्वरता और खूबसूरती के गुज़र जाने का गहरा तफ़कर है। जब शायर पूछते हैं कि क्या कोई ताज़ा गुल अब वैसी शाख़ निकाल पाया है, तो वो सिर्फ़ फूलों की बात नहीं कर रहे होते। वो पूछ रहे होते हैं कि क्या कोई ख़ुशी, कोई वादा, या कोई प्यार आज भी उतना ही ज़िंदादिल और सच्चा है, जितना पहले था। यह एहसास बेबसी और धुंधले होते वक़्त की सच्चाई को बयां करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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