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'मीर' की बात पे हर वक़्त ये झुँझलाया कर सड़ी है ख़ब्ती है वो शेफ़्ता है मजनूँ है

Do not always fret over what Mir has said; that woman is ruined, that woman is a seductress, and that woman is Majnun.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मीर के कहे पर हर समय इतना झगड़ना नहीं चाहिए; वह स्त्री सड़ी है, वह स्त्री ख़ब्ती है और वह स्त्री मजनूँ है।

विस्तार

इस शेर में, मीर तक़ी मीर अपने श्रोताओं से कहते हैं कि मेरे शब्दों पर हर पल गुस्सा न करें। वह मज़ाकिया अंदाज़ में कहते हैं कि जिन लोगों का ज़िक्र किया है—खब्ती, शेफ़्ता, और मजनूँ—ये सभी अपने आप में ही थोड़े बिगड़े या नाटकीय हैं। यह एक आत्म-जागरूक शायरी है, जो बताती है कि जीवन ही तमाम किरदारों से भरा है, और हमें किसी को भी बेवजह जज नहीं करना चाहिए।

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