शहर कितना जो कोई उन में सरिश्क-ए-अफ़्शाँ हो — मीर तक़ी मीर
“Oh, city, if only someone were a radiant, pure heart within you, Your face, stained with tears of sorrow, is the very strength of my spirit.”
अर्थ
शहर कितना जो कोई उन में सरिश्क-ए-अफ़्शाँ हो, रू-कश-ए-गिर्या-ए-ग़म हौसला-ए-हामूँ है। (अर्थात, शहर की सुंदरता या महत्व तब तक अधूरा है, जब तक उसमें कोई निश्छल और पवित्र आत्मा न आ जाए। और तुम्हारे आँसुओं से सना यह चेहरा मेरे हौसले का आधार है।)
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ एक शहर की बात नहीं करता, बल्कि इंसान के दिल की बात करता है। शायर कहते हैं कि किसी भी जगह की असली महानता उसके पत्थरों में नहीं होती.... बल्कि उसके लोगों के दर्द और भावनाओं में होती है। ग़म के आँसू... वो कमजोरी नहीं, बल्कि एक तरह की ताक़त हैं। यह शेर बताता है कि हमारी सबसे गहरी भावनाएँ ही हमें ज़िंदगी जीने का हौसला देती हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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