उस से आँखों को मिला जी में रहे क्यूँकर ताब
चश्म-ए-ए'जाज़-ए-मिज़ा सहर-ए-निगह-ए-अफ़्सूँ है
“From him, whose eyes meet mine, what is the whim that remains? / The gaze of wondrous grace is the morning of enchanting sight.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
उस व्यक्ति से, जिसकी आँखों में देखकर मेरा मन मोहित हो जाए, मन में और क्या इच्छा या उत्साह बचा है? उसकी अद्भुत कृपा भरी दृष्टि, एक मनमोहक सुबह के समान है।
विस्तार
मिर्ज़ा तक़ी मीर ने महबूब की निगाहों के नशीले जादू को बहुत खूबसूरती से बयां किया है। शायर कहते हैं कि उन आँखों में झाँकना भी कितना हिम्मत का काम है! क्योंकि ये आँखें किसी जादू के आइने जैसी हैं, और इन आँखों की एक झलक ही सुबह के जादू से कम नहीं है। यह शेर इश्क़ में पूरी तरह खो जाने की बात करता है।
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