हम तो गए थे शैख़ को इंसान बूझ कर — मीर तक़ी मीर

हम तो गए थे शैख़ को इंसान बूझ कर पर अब से ख़ानक़ाह में जाया न जाएगा

“We had gone to the Sheikh, thinking he was a man, But from now on, we shall not go to the Khanqah.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हम तो शैख़ के पास इंसान समझकर गए थे, पर अब से हम ख़ानक़ाह में नहीं जाएँगे।

विस्तार

यह शेर एक ऐसे मोड़ की बात करता है, जहाँ इंसान अपने अंदर का सच खोज लेता है। शायर कहते हैं कि पहले वो किसी गुरु (शैख़) के पास गए थे, बस इंसानियत को समझने के लिए। पर अब.... अब उन्हें लगता है कि वह पुरानी रस्में, वो खानक़ाह... उनके लिए अब मायने नहीं रखती। यह अपनी आंतरिक समझ की जीत है, एक ऐसा अहसास कि अब राहें बदल चुकी हैं!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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