हम बे-ख़ुदान-ए-महफ़िल-ए-तस्वीर अब गए — मीर तक़ी मीर
हम बे-ख़ुदान-ए-महफ़िल-ए-तस्वीर अब गए
आइंदा हम से आप में आया न जाएगा
“We have become strangers to the gathering of faces; now, by no means, will you be found in me.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हम महफ़िल-ए-तस्वीर के बेख़ुद हो गए हैं; अब आप मुझसे (या मुझमें) नहीं मिल सकते।
विस्तार
यह शेर सिर्फ एक जुदाई की बात नहीं है, बल्कि एक आत्म-सम्मान की घोषणा है। शायर कह रहे हैं कि उन्होंने उस महफ़िल को छोड़ दिया है, जहाँ सिर्फ़ दिखावे और तस्वीरों का इज़हार होता है। यह एक बहुत ही गहरा इल्ज़ाम है महबूब पर—कि अब वे उन्हें अपने अंदर नहीं ढूंढ पाएगी। यह वियोग नहीं, बल्कि अपनी पहचान को वापस पाना है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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