उदासियाँ थीं मिरी ख़ानका में काबिल-ए-सैर
सनम-कदे में तो टिक आ के दिल लगा भी है
“My melancholy was capable of wandering in the Khanqah, But in the presence of the beloved, my heart could not even stay put.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मेरी उदासियाँ खानकाह में घूमने लायक थीं, पर सनम की उपस्थिति में तो मेरा दिल टिक ही नहीं पाया।
विस्तार
यह शेर बहुत गहरा है। शायर कहते हैं कि उनकी उदासियाँ पहले इतनी मज़बूत थीं कि वो ख़ानक़े में भी भटक सकती थीं। लेकिन जब से उन्हें सनम मिला, उनकी उदासी ने एक जगह टिककर, दिल में बसना सीख लिया है। मतलब ये हुआ कि मोहब्बत ने उनकी उदासी को एक ठिकाना दे दिया। यह दर्द अब कहीं और नहीं, बस दिल में ही बस गया है।
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