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गर्द-ए-रह उस की यारब किस और से उठेगी सौ सौ ग़ज़ाल हर-सू आँखें लगा रहा है

From the dust of separation, whose beloved will rise from any other? My eyes are shedding a hundred ghazals in every direction.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

गर्द-ए-रह उस की यारब किस और से उठेगी, यानी मेरे विरह के धूल से उसकी प्रियतमा किसी और से कैसे उठेगी। सौ सौ ग़ज़ाल हर-सू आँखें लगा रहा है, यानी मेरी आँखें हर दिशा में सौ-सौ ग़ज़लें बहा रही हैं।

विस्तार

यह शेर एक ऐसे प्यार की गहराई को बयान करता है जो सबसे अलग है। शायर कहते हैं कि महबूब की राह की धूल... किसी और से कैसे उठेगी? इसका मतलब है कि उसकी याद का एहसास केवल उसी से जुड़ा है। दूसरी पंक्ति बताती है कि यह यादें कितनी प्रबल हैं—हर तरफ़, हर दिशा में, आँखें ग़ज़लें सुना रही हैं। यह वियोग और यादों के बोझ को दर्शाती है।

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