मैं ने इस उस सन्ना' से सर खींचा है — मीर तक़ी मीर
मैं ने इस उस सन्ना' से सर खींचा है
कि हर इक कूचे में जिस के थे हुनर-वर कितने
“From that silence, I have drawn a thread, Where in every lane, how many skilled ones were found.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मैंने उस सन्नाटे से एक धागा खींचा है कि हर गली में जिनके हुनर-वर थे, वे कितने।
विस्तार
यह शेर एक बहुत ही गहरे अहसास को बयान करता है। शायर कहते हैं कि मैं उस सन्नाटे से बाहर आया हूँ.... और जब बाहर आया, तो देखा कि हर गली में, हर नुक्कड़ पर.... प्रतिभा और हुनर का ऐसा सैलाब है! यह सिर्फ़ भीड़ नहीं है, यह जीवन की रूह है। एक तरफ़ सन्नाटा, और दूसरी तरफ़ ये कलाओं का शोर! क्या नज़ारा है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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