हम ने जाना था सुख़न होंगे ज़बाँ पर कितने — मीर तक़ी मीर
हम ने जाना था सुख़न होंगे ज़बाँ पर कितने
पर क़लम हाथ जो आई लिखे दफ़्तर कितने
“We knew there would be so many verses on the tongue, But when the pen came to hand, how many lines were written.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हमने जाना था कि ज़ुबान पर कितने सुखन होंगे, पर जब क़लम हाथ आया तो दफ़्तर में कितने लिखे।
विस्तार
यह शेर बहुत गहरा है.... शायर कहते हैं कि जब तक हम बस दिल में बात रखते हैं, तब तक वो आसान लगती है। लेकिन जब हम उसे क़लम की नोक पर उतारते हैं, जब उसे कागज़ पर लिखना पड़ता है, तो लगता है जैसे कोई विशालकाय ज़िम्मेदारी आ गई हो। यह कला और भावनाओं के बीच के अंतर को बयां करता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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