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शमशीर-ए-सितम उस की अब गो का चले हर-दम शोरीदा-सर अपने से हम बाँध कफ़न बैठे

The sword of cruelty, from now on, will walk every moment with her; With our own heads, we have tied the shroud.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

उसकी क्रूरता की तलवार अब हर पल उसके साथ चलेगी; हमने अपने सिरों से अपने लिए कफ़न बाँध लिए।

विस्तार

यह शेर दर्द की उस पराकाष्ठा को बयां करता है, जहाँ इंसान ने हार मान ली है। शायर कह रहे हैं कि महबूब का ज़ुल्म तो हर पल साथ है.... लेकिन इतना दर्द है कि उन्होंने खुद अपने लिए कफ़न बाँध लिया है। यह सिर्फ़ मृत्यु की तैयारी नहीं है, यह एक तरह का भावनात्मक समर्पण है, एक गहरी निराशा है!

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