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जुज़ ख़त के ख़याल उस के कुछ काम नहीं हम को सब्ज़ी पिए हम अक्सर रहते हैं मगन बैठे

The thoughts of a letter, those things are nothing to us, We often sit immersed, as if drinking vegetable soup.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हमारे लिए उस के ख़त के ख़याल कुछ भी नहीं हैं; हम अक्सर मगन होकर बैठे रहते हैं, जैसे सब्ज़ी पी रहे हों।

विस्तार

यह शेर एक अजीब सी तसल्ली और उदासी को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि महबूब के कुछ ख़त याद करके भी हमें कोई फ़र्क नहीं पड़ता। हम तो इतने मगन हैं कि बस रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बैठे रहते हैं, जैसे कि 'सब्ज़ी' खाना... और उस साधारणपन में ही हमें अपना सुकून मिल गया है। यह इश्क़ के जुनून से कहीं ज़्यादा गहरी, एक रूहानी तसल्ली है।

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