“How long shall I roam, oh, if only you would come, And sit like a maiden of the desert winds, my beloved.”
उर्यान फिरें कब तक ऐ काश कहीं आ कर, तेरा गर्द बयाबाँ की बाला-ए-बदन बैठे। इसका अर्थ है कि वक्ता यह कामना करता है कि वह भटकना कब तक जारी रखे, और काश तुम आकर बंजर रेगिस्तान की वीरांगना बनकर बैठो।
यह शेर एक बहुत ही दिल को छू लेने वाली पुकार है। शायर अपने महबूब से पूछ रहे हैं कि आप यूँ ही भटकते कब रहेंगे? वो तो बस ये ख्वाहिश रखते हैं कि आप आकर इस वीराने की खूबसूरती पर बैठ जाएं। यह न सिर्फ एक जगह की बात है, बल्कि यह दिल में एक ठहराव, एक सुकून की तलाश है। यह दूरी मिटाने और करीब आने का एहसास कराता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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