छूटूँ कहीं ईज़ा से लगा एक ही जल्लाद — मीर तक़ी मीर
“I shall escape from this place, attached to a single executioner; This grace of yours shall remain upon my head until the Day of Judgment.”
अर्थ
मैं कहीं इस जगह से बच निकलूँगा, जिसे केवल एक जल्लाद से जोड़ा गया है; यह एहसान तुम्हारे सिर पर क़यामत के दिन तक रहेगा।
विस्तार
यह शेर जवाबदेही और ईश्वरीय कृपा की बात करता है। शायर कहते हैं कि अगर मैं कहीं भी से बच निकला, तो भी एक जल्लाद इंतज़ार कर रहा होगा—वह है क़यामत का दिन। दूसरा मिसरा बताता है कि जो एहसान मुझे मिला है, वह उस दिन तक मेरे सर पर रहेगा। यह ज़िन्दगी में सचेत भक्ति और आभार से जीने का एक बहुत ही गहरा एहसास है।
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