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वा'दा तो किया इस से दम-ए-सुब्ह का लेकिन उस दम तईं मुझ में भी अगर जान रहेगा

I had promised this much to the breath of dawn, but If life remains within me till that dawn,

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मैंने सुबह की पहली किरण से यह वादा किया था, लेकिन अगर उस सुबह तक मुझमें जान बाकी रहती है।

विस्तार

यह शेर ज़िन्दगी की उस उलझन को बयां करता है, जहाँ वादे तो बहुत होते हैं, लेकिन खुद का वजूद कितना कमज़ोर होता है। शायर कहते हैं कि हमने तो सुबह के वादे किए.... पर असली सवाल तो यह है कि क्या उस वादे के वक़्त तक.... हमारे अंदर ज़िन्दगी बची होगी? यह सिर्फ़ इश्क़ की बात नहीं, यह वजूद की बात है!

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