अब की हवा-ए-गुल में सैराबी है निहायत — मीर तक़ी मीर

अब की हवा-ए-गुल में सैराबी है निहायत जू-ए-चमन पे सब्ज़ा मिज़्गान-ए-चश्म-ए-तर है

“In the current air of roses, there is an overwhelming intoxication; upon the lawn, the fresh greenness is the decoration of the eye.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

अब गुलाब की हवा में बहुत अधिक नशा है; और बगीचे पर ताज़ा हरियाली आँखों का श्रृंगार है।

विस्तार

मीर तक़ी मीर ने यहाँ एक मदहोश कर देने वाले नज़ारे को बयां किया है। वो कहते हैं कि आज फूलों की हवा में एक अजीब सी नशा है, एक तरह का भ्रम। फिर, वो बाग़ के रास्ते की हरी-भरी रौनक की तुलना आँखों के आँसुओं की किनारी से करते हैं। यह एक बहुत ही गहरा और मार्मिक एहसास है—इतनी खूबसूरती कि वो दर्द जैसी लगती है, जैसे कोई आँसू जो बहेगा नहीं!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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