Sukhan AI
होगा ऐसा भी कोई रोज़ कि मज्लिस से कभू
हम तो एक-आध घड़ी उठ के जुदा बैठेंगे

There will come a day, perhaps, when from the gathering place, We will rise and sit apart for a little while.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

ऐसा दिन भी आएगा जब महफ़िल से कभी हम उठकर थोड़े समय के लिए अलग बैठेंगे।

विस्तार

यह शेर उस दिल की अवस्था को बयां करता है, जब इंसान इतना थक जाता है... कि उसे महफ़िल की भीड़ से दूर, बस थोड़ी सी तन्हाई चाहिए। यह अकेले बैठ जाना, किसी से मुँह मोड़ना नहीं है। बल्कि यह दिल का वह इशारा है जो कहता है कि 'बस, अब मुझे अपने लिए एक पल चाहिए।' Mir Taqi Mir ने इस एहसास को कितनी खूबसूरती से बयान किया है।

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